‘अन्ना आंदोलन में मनमोहन सरकार बात करने गई थी, पर ये सरकार…’— सोनम वांगचुक के अनशन पर भड़के उमर अब्दुल्ला

जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने नीट परीक्षा विवाद को लेकर जंतर-मंतर पर 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक की सेहत पर चिंता जताई है। उन्होंने केंद्र सरकार के रवैये की तुलना यूपीए काल के अन्ना हजारे आंदोलन से करते हुए तीखे सवाल उठाए।

सोनम वांगचुक के अनशन पर उमर अब्दुल्ला का बड़ा हमला
सोनम वांगचुक के अनशन पर उमर अब्दुल्ला का बड़ा हमला

Sonam Wangchuk Hunger Strike: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नीट परीक्षा में कथित धांधली के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को लेकर केंद्र सरकार के रवैये की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि वांगचुक की लगातार बिगड़ती सेहत के बावजूद केंद्र सरकार पूरी तरह संवेदनहीन नजर आ रही है। उमर अब्दुल्ला ने इस मामले की तुलना यूपीए सरकार के दौरान अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से करते हुए भाजपा सरकार पर सवाल उठाए।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए अपने पोस्ट में उमर अब्दुल्ला ने लिखा कि सोनम वांगचुक की मांग केवल इतनी है कि नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के पीड़ितों को न्याय मिले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह सरकार के समय अन्ना हजारे के अनशन के दौरान सरकार के मंत्री उनसे मिलने पहुंचे थे और अनशन खत्म करने का आग्रह किया था, लेकिन मौजूदा सरकार ने अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान तक जारी नहीं किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन क्या करुणा और इंसानियत का भी कोई महत्व नहीं रह गया है।

सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन अब 20वें दिन में पहुंच चुका है। वे नीट-यूजी परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के विरोध में जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे हैं। उनकी सेहत पर नजर रखने वाले वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सतीश लांबा के अनुसार, लगातार तीन सप्ताह से भोजन न करने के कारण उनका वजन 9 किलोग्राम से अधिक घट चुका है, जिससे स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

वांगचुक की बिगड़ती तबीयत को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में भी एक याचिका दाखिल की गई है। याचिका में अदालत से मांग की गई है कि प्रशासन को उनके स्वास्थ्य की समुचित निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सीय हस्तक्षेप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएं, ताकि उनकी जान को किसी तरह का खतरा न हो।

इस आंदोलन का आयोजन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) कर रही है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी केंद्र सरकार से अपील की है कि इस मुद्दे को प्रतिष्ठा या अहंकार की लड़ाई न बनाया जाए। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति की जान दांव पर लगी हो, तब संवेदनशीलता और जवाबदेही सबसे महत्वपूर्ण होती है। उनके अनुसार, गलती स्वीकार करना कमजोरी नहीं बल्कि लोकतांत्रिक परिपक्वता की पहचान है।

फिलहाल केंद्र सरकार या केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से उमर अब्दुल्ला के आरोपों या सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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