अमेरिका-ईरान समझौते से पाकिस्तान में जगी उम्मीद, दोबारा शुरू हो सकती है ईरान-पाक गैस पाइपलाइन परियोजना

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद पाकिस्तान को ईरान-पाकिस्तान गैस पाइपलाइन परियोजना के पुनर्जीवित होने की उम्मीद है। प्रतिबंधों में राहत मिलने पर पाकिस्तान को सस्ती गैस और ऊर्जा सुरक्षा का बड़ा लाभ मिल सकता है।

अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद पाकिस्तान में नई उम्मीदें जगी हैं। माना जा रहा है कि यदि समझौते के तहत ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत मिलती है, तो लंबे समय से रुकी ईरान-पाकिस्तान गैस पाइपलाइन परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है।

ईरान-पाकिस्तान गैस पाइपलाइन कई वर्षों से चर्चा में रही है, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इस पर अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी। पाकिस्तान इस परियोजना को अपने ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानता है और अब हालिया घटनाक्रम के बाद इसे लेकर सकारात्मक माहौल बनता दिखाई दे रहा है।

पाकिस्तान की कायद-ए-आजम यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर अहमद रिद का मानना है कि ईरान के साथ ऊर्जा सहयोग बढ़ने से पाकिस्तान को अपेक्षाकृत सस्ते ऊर्जा स्रोत उपलब्ध हो सकते हैं। उनका कहना है कि भौगोलिक निकटता के कारण ऊर्जा आयात की लागत भी कम होगी।

ईरान-पाकिस्तान गैस पाइपलाइन परियोजना की शुरुआत वर्ष 1995 में ईरान, पाकिस्तान और भारत के संयुक्त प्रस्ताव के रूप में हुई थी। इसका उद्देश्य ईरान के पार्स गैस क्षेत्र से गैस को दक्षिण एशिया तक पहुंचाना था। बाद में भारत इस परियोजना से अलग हो गया और यह केवल ईरान तथा पाकिस्तान के बीच सीमित रह गई।

करीब 2700 किलोमीटर लंबी इस प्रस्तावित पाइपलाइन के जरिए बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति की जा सकती है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्रों की ऊर्जा जरूरतों को भी पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

जानकारी के अनुसार, ईरान अपनी सीमा तक पाइपलाइन का निर्माण पूरा कर चुका है, जबकि पाकिस्तान की ओर से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। वर्ष 2013 में परियोजना की औपचारिक शुरुआत हुई थी, लेकिन प्रतिबंधों और संभावित अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण इसका काम आगे नहीं बढ़ पाया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रतिबंधों में राहत मिलती है तो पाकिस्तान को पड़ोसी देश से सीधे गैस आयात करने का अवसर मिलेगा। इससे ऊर्जा लागत कम हो सकती है और देश की ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।

इसके अलावा, ईरान पर प्रतिबंधों में ढील मिलने की स्थिति में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) परियोजना के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। माना जा रहा है कि इससे क्षेत्रीय संपर्क मजबूत होगा और दक्षिण एशिया, मध्य एशिया तथा मध्य पूर्व के बीच व्यापारिक गतिविधियों को नया आधार मिल सकता है।

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