Solar Eclipse 2026: कब लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण? जानें समय, सूतक काल और धार्मिक महत्व

Solar Eclipse 2026: साल 2026 में लगने वाला दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण धार्मिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक तीनों ही दृष्टिकोणों से बेहद खास होने वाला है। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहण को एक बहुत ही महत्वपूर्ण खगोलीय घटना माना जाता है और इस बार का ग्रहण अगस्त के महीने में लगने जा रहा है।

सूर्य ग्रहण 2026 (Image: ChatGPT)
सूर्य ग्रहण 2026 (Image: ChatGPT)

Solar Eclipse 2026: सूर्य ग्रहण को हिंदू धर्म, ज्योतिष शास्त्र और विज्ञान तीनों ही दृष्टिकोणों से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। जब भी सूर्य ग्रहण लगता है, लोगों के मन में इसके प्रभाव, धार्मिक मान्यताओं और नियमों को लेकर कई सवाल उठते हैं। साल 2026 में लगने वाला दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण भी खास माना जा रहा है। यह ग्रहण अगस्त महीने में पड़ेगा और धार्मिक दृष्टि से इसका विशेष महत्व रहेगा। खास बात यह है कि यह ग्रहण हरियाली अमावस्या के दिन लग रहा है, जिससे इसकी महत्ता और बढ़ जाती है।

कब लगेगा साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण?

साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगेगा। यह ग्रहण श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर पड़ रहा है। खास बात यह है कि इसी दिन हरियाली अमावस्या भी मनाई जाएगी, जिसके कारण इस ग्रहण का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है। हिंदू मान्यताओं में हरियाली अमावस्या को पूजा-पाठ, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

सूर्य ग्रहण का समय

ग्रहण के समय की बात करें तो भारतीय समयानुसार यह सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 की रात 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और 13 अगस्त की सुबह 4 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, जिसे दुनिया के कुछ हिस्सों में साफ तौर पर देखा जा सकेगा।

क्या भारत में दिखाई देगा ग्रहण?

यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस ग्रहण का दर्शन भारत में नहीं होता, उसका सूतक काल भी मान्य नहीं माना जाता। यही वजह है कि भारत में रहने वाले लोगों पर इस ग्रहण से जुड़े सूतक नियम लागू नहीं होंगे और सामान्य दिनचर्या जारी रहेगी।

सूर्य ग्रहण का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में ग्रहण काल को आध्यात्मिक साधना और पूजा-पाठ के लिए विशेष समय माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि ग्रहण के दौरान भगवान का ध्यान, मंत्र जाप और धार्मिक अनुष्ठान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। वहीं ग्रहण के समय भोजन पकाने और खाने से बचने की परंपरा भी प्रचलित है। ग्रहण समाप्त होने के बाद गंगा स्नान या शुद्ध जल से स्नान करना शुभ और शुद्धिकरण का प्रतीक माना जाता है।

ज्योतिषीय दृष्टि से भी सूर्य ग्रहण को महत्वपूर्ण माना जाता है और कई लोग इसे राशियों तथा ग्रहों के प्रभाव से जोड़कर देखते हैं। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सूर्य ग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना है, जो तब घटित होती है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और सूर्य का प्रकाश कुछ समय के लिए ढक जाता है।

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