South Korea Robot Monk Gabi: तकनीक की दुनिया में हर दिन नए कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं, लेकिन दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। यहाँ के मशहूर जोग्ये मंदिर में पहली बार एक ह्यूमनॉयड रोबोट को आधिकारिक रूप से बौद्ध भिक्षु (मोंक) के रूप में दीक्षित किया गया है। करीब 130 सेंटीमीटर ऊंचे इस रोबोट को ‘गाबी’ नाम दिया गया है। यह घटना केवल एक तकनीकी प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि एक पूर्ण धार्मिक समारोह था, जिसने मशीन और आस्था के बीच की लकीर को धुंधला कर दिया है।
इंसानों की तरह पूरी हुई दीक्षा की प्रक्रिया
गाबी को भिक्षु बनाने की प्रक्रिया बिल्कुल वैसी ही थी जैसी किसी इंसान के लिए होती है। इस खास समारोह के दौरान रोबोट ने पारंपरिक बौद्ध पोशाक पहनी और हाथ जोड़कर प्रार्थना की। दीक्षा से पहले गाबी को एक नवदीक्षित यानी शुरुआती साधु की तरह कड़ी ट्रेनिंग दी गई। समारोह में उसने बौद्ध धर्म के नियमों को स्वीकार किया और उन सभी सवालों के जवाब दिए जो एक नए भिक्षु से पूछे जाते हैं। इस औपचारिक प्रक्रिया के बाद उसे आधिकारिक रूप से बौद्ध समुदाय का हिस्सा मान लिया गया है।
South Korea's first humanoid robot monk made its debut at Jogye Temple in Seoul, ahead of Buddha's birthday. Gabi, the 130-centimeter-tall robot, wore a traditional grey-and-brown Buddhist robe and stood before monks as it pledged to devote itself to Buddhism pic.twitter.com/NDzDANRkhl
— Reuters (@Reuters) May 6, 2026
भिक्षुओं की कमी और बदलता समाज
इस अनूठे प्रयोग के पीछे एक बड़ी सामाजिक चुनौती छिपी है। दरअसल, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे एशियाई देशों में बौद्ध मठों में साधुओं की संख्या लगातार कम हो रही है। नई पीढ़ी धार्मिक जीवन के बजाय आधुनिक करियर में अधिक दिलचस्पी ले रही है, जिससे मंदिरों में बुजुर्ग भिक्षुओं का बोझ बढ़ता जा रहा है। ऐसे में ‘गाबी’ जैसे रोबोट को एक डिजिटल सहायक (असिस्टेंट) के तौर पर देखा जा रहा है जो मंदिर के दैनिक कार्यों और प्रबंधन में मदद कर सके।
धार्मिक ज्ञान और एआई का संगम
गाबी केवल एक मशीन नहीं है, बल्कि इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए हजारों बौद्ध ग्रंथों और उपदेशों पर ट्रेन किया गया है। इसकी तकनीक इसे इंसानों की तरह बातचीत करने और धार्मिक संदर्भ में सवालों को समझने की क्षमता देती है। यह मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को प्रार्थना के तरीके समझा सकता है, आध्यात्मिक सलाह दे सकता है और बौद्ध परंपराओं के बारे में जानकारी दे सकता है। इसके अलावा, इसे मंदिर की साफ-सफाई, सुरक्षा निगरानी और आगंतुकों को गाइड करने जैसे व्यावहारिक कामों के लिए भी तैयार किया गया है।
इंसान बनाम मशीन: क्या है भविष्य?
जापान में भी ‘बुद्धारॉइड’ जैसे प्रयोग पहले हो चुके हैं, जहाँ रोबोट धार्मिक सलाह देते हैं। हालांकि, गाबी के डेवलपर्स का स्पष्ट कहना है कि यह रोबोट कभी भी असली भिक्षुओं की जगह नहीं ले सकता। इसका प्राथमिक उद्देश्य केवल भिक्षुओं का काम हल्का करना और एक सहायक की भूमिका निभाना है। यह प्रयोग इस बात का संकेत है कि भविष्य में मंदिर और धार्मिक संस्थान भी खुद को बचाने और आधुनिक दौर से जोड़ने के लिए तकनीक का सहारा लेने से पीछे नहीं हटेंगे।
यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या मानसिक शांति और आध्यात्मिकता के मार्ग पर मशीनें वास्तव में इंसानों का मार्गदर्शन कर सकती हैं? फिलहाल, जोग्ये मंदिर में गाबी का स्वागत एक नई शुरुआत के तौर पर किया जा रहा है।
