ढाका/गुवाहाटी: भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक रिश्तों में एक बार फिर तल्खी देखने को मिल रही है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर दिए गए एक विवादित बयान ने पड़ोसी देश बांग्लादेश को नाराज कर दिया है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए ढाका में भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त पवन बाधे को तलब किया और सरमा के बयान पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
पूरा विवाद हिमंत बिस्वा सरमा के एक सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ। मुख्यमंत्री ने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर कुछ धुंधली तस्वीरों के साथ लिखा था कि असम में 20 विदेशी नागरिकों को पकड़ा गया और उन्हें वापस बांग्लादेश भेज दिया गया है। उन्होंने कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा, “लातों के भूत बातों से नहीं मानते। अगर घुसपैठिए खुद से नहीं जाते, तो हम उन्हें बाहर निकालते हैं।” उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि असम अपनी लड़ाई जारी रखेगा और घुसपैठियों को वापस भेजने का यह सिलसिला थमेगा नहीं।
लातों के भूत बातों से नहीं मानते।
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) April 25, 2026
We continuously remind ourselves of this prophetic line when we expel infiltrators from Assam who don't leave themselves.
For instance these 20 illegal Bangladeshis who were PUSHED BACK last night.
Assam will fight, Pushbacks WILL CONTINUE. pic.twitter.com/wLiIoR4TJc
इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय ने भारतीय राजनयिक को तलब कर स्पष्ट किया कि ऐसे सार्वजनिक बयान दोनों पड़ोसी देशों के बीच के द्विपक्षीय संबंधों के लिए अपमानजनक हैं। बांग्लादेश के महानिदेशक (दक्षिण एशिया) इशरत जहां ने भारत का पक्ष सुन रहे कार्यवाहक उच्चायुक्त को बताया कि इस तरह की टिप्पणियां संबंधों में अनावश्यक तनाव पैदा करती हैं। बांग्लादेश ने इस बात पर जोर दिया कि संवेदनशील मुद्दों पर बात करते समय संयम बरतना बेहद जरूरी है, अन्यथा यह द्विपक्षीय हितों को नुकसान पहुँचा सकता है।
उल्लेखनीय है कि भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में यह उतार-चढ़ाव पिछले कुछ समय से जारी है। अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद जब मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी थी, तब दोनों देशों के बीच कड़वाहट बढ़ गई थी। उस दौरान बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों और अल्पसंख्यक हिंदुओं पर कट्टरपंथियों द्वारा किए गए हमलों की खबरों ने भारत की चिंताएं बढ़ा दी थीं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उस समय कई हिंदुओं की हत्या हुई और दर्जनों मंदिरों को निशाना बनाया गया था।
हालांकि, वर्तमान में बांग्लादेश के राजनीतिक हालात बदले हैं। फरवरी 2026 में तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की सरकार बनने के बाद से संबंधों को सुधारने की कोशिशें फिर से शुरू हुई हैं। हाल ही में बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने भारत का दौरा किया था और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात कर रिश्तों को पटरी पर लाने की वकालत की थी। ऐसे में हिमंत बिस्वा सरमा का यह बयान और उस पर बांग्लादेश की तीखी प्रतिक्रिया इन कूटनीतिक प्रयासों के बीच एक नई चुनौती बनकर सामने आई है।
