Boycott Lenskart: चश्मा बनाने वाली मशहूर कंपनी लेंसकार्ट अपने कर्मचारियों के लिए जारी किए गए नए ‘स्टाइल गाइड’ को लेकर बड़े विवादों के घेरे में आ गई है। फिल्म निर्माता और सामाजिक कार्यकर्ता अशोक पंडित ने कंपनी की इस नई ड्रेस कोड पॉलिसी पर बेहद तीखी आपत्ति जताई है और सोशल मीडिया के जरिए लोगों से ‘बायकॉट लेंसकार्ट’ की पुरजोर अपील की है। आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने अपने आधिकारिक नियमों में हिजाब और पगड़ी पहनने को तो कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी है, लेकिन बिंदी, तिलक और कलावा जैसे पारंपरिक हिंदू धार्मिक प्रतीकों को धारण करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है।
अशोक पंडित ने इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लेंसकार्ट के स्टाइल गाइड के कथित 11वें पन्ने का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस गाइड में स्टोर पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए बेहद कड़े नियम बनाए गए हैं, जिसमें लिखा है कि अगर कर्मचारी हिजाब पहनते हैं तो उसका रंग काला होना चाहिए और वह मीडियम चेस्ट कवरेज वाला होना चाहिए ताकि कंपनी का लोगो न ढके। इसी तरह सिखों के लिए केवल काले रंग की पगड़ी पहनने की इजाजत दी गई है, लेकिन इसके उलट गाइड में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया है कि किसी भी तरह का धार्मिक टीका, तिलक, बिंदी या स्टिकर लगाने की कोई इजाजत नहीं है।
कंपनी की इस विवादित नीति में कलावा पहनने और मेहंदी लगाने पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। नियमों के मुताबिक मेहंदी केवल विशेष परिस्थितियों में ही लगाई जा सकती है और उसके लिए भी मैनेजमेंट से कम से कम 10 दिन पहले लिखित मंजूरी लेना अनिवार्य है। इसके साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि महिला कर्मचारियों का सिन्दूर दिखाई नहीं देना चाहिए। अशोक पंडित ने पीयूष बंसल को संबोधित करते हुए कहा कि एक ऐसी कंपनी जो मुख्य रूप से हिंदू ग्राहकों और कर्मचारियों पर निर्भर है, वह उनके धार्मिक प्रतीकों के प्रति इतनी असंवेदनशील कैसे हो सकती है।
लेखिका शेफाली वैद्य ने भी इस कथित पॉलिसी के स्क्रीनशॉट को साझा करते हुए इसकी पुष्टि की और कंपनी के दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे हिंदू भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला दृष्टिकोण करार दिया है। सोशल मीडिया पर भी इस खबर के फैलते ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है और कई यूजर्स ने इसे ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ का नाम देते हुए कंपनी के उत्पादों के बहिष्कार की मांग शुरू कर दी है। फिलहाल इस पूरे बढ़ते विवाद पर लेंसकार्ट या उसके संस्थापक की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या सफाई पेश नहीं की गई है।
