उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले से एक अत्यंत हृदयविदारक और कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई है। यहाँ 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली एक 17 वर्षीय दलित छात्रा ने न्याय की आस टूटने के बाद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। छात्रा के परिजनों का आरोप है कि होली के दिन गांव के ही तीन युवकों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) किया था, लेकिन पुलिस ने आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई करने के बजाय मामले को ‘रंग लगाने’ के विवाद में बदलकर दबाने की कोशिश की।
परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, घटना 4 मार्च यानी होली वाले दिन की है। छात्रा जब घर से कुछ दूर पानी भरने गई थी, तभी गांव के तीन युवकों ने उसे अगवा कर लिया और खेत में ले जाकर उसके मुंह में कपड़ा ठूंसकर दो घंटे तक दरिंदगी की। छात्रा का छोटा भाई जब उसे ढूंढने निकला, तब वह खेत में बदहवास हालत में मिली थी। आरोप है कि जब परिजन थाने पहुंचे, तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें यह कहकर डराया कि “बड़ा केस लिखवाओगे तो बेटी की शादी नहीं होगी, इसलिए हल्का मामला दर्ज कराओ।” पुलिस ने कथित तौर पर सिर्फ रंग लगाने की तहरीर ली और आरोपियों को अगले दिन यह चेतावनी देकर छोड़ दिया कि वे 6 महीने तक गांव में न दिखें।
जब आरोपी कुछ ही दिनों बाद गांव में बेखौफ घूमने लगे, तो छात्रा गहरे सदमे और मानसिक दबाव में आ गई। मंगलवार को जब उसके माता-पिता खेत पर गए थे, तब उसने अपनी छोटी बहनों को पानी लेने भेज दिया और घर के भीतर आत्मघाती कदम उठा लिया। बहनें जब लौटीं तो अपनी बड़ी बहन का शव फंदे से लटका देख चीख पड़ीं। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। छात्रा की मौत के बाद गांव में तनाव व्याप्त है और पुलिस प्रशासन के खिलाफ भारी रोष देखा जा रहा है।
इस पूरे प्रकरण में पुलिस की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। हालांकि, चित्रकूट के पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने सफाई देते हुए कहा है कि 6 मार्च को जब छात्रा की मां थाने आई थीं, तो उन्होंने केवल जबरन रंग लगाने की मौखिक सूचना दी थी। एसपी के अनुसार, परिजनों ने खुद कहा था कि वे लोक-लाज और बेटियों की शादी के डर से कोई बड़ी कार्रवाई नहीं चाहते हैं, जिसका उल्लेख जनरल डायरी (GD) में भी है। इसके बावजूद, अब छात्रा की आत्महत्या के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और कुछ लोगों को हिरासत में लेकर फोरेंसिक टीम के साथ जांच शुरू कर दी है। एसपी ने यह भी आश्वासन दिया है कि यदि शुरूआती जांच में पुलिस की लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
