बालोद: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से न्यायिक व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है। गुंडरदेही में पदस्थ न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी प्रशांत कुमार देवांगन को एक धमकी भरा पत्र मिला है, जिसमें उनसे 3 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई है और परिवार सहित जान से मारने की धमकी दी गई है। इस मामले में मजिस्ट्रेट ने 8 अप्रैल को एफआईआर दर्ज कराई है, जिसके बाद पूरे जिले में हड़कंप मच गया है।
घटना का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने एफआईआर की कॉपी पोर्टल पर अपलोड की। जानकारी के अनुसार 27 मार्च 2026 को दोपहर करीब 3 बजकर 25 मिनट पर कोर्ट कार्य के दौरान एक पोस्टमैन मजिस्ट्रेट के कार्यालय में एक बंद लिफाफा देकर गया। जब मजिस्ट्रेट ने स्वयं लिफाफा खोलकर पत्र पढ़ा, तो उसमें लिखी धमकी भरी बातों ने सभी को चौंका दिया।
घटना के बाद मजिस्ट्रेट प्रशांत कुमार देवांगन खुद थाने पहुंचे और अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने मामले में तत्काल जांच शुरू करने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
धमकी भरे पत्र में आरोपी ने खुद को नक्सली संगठन से जुड़ा बताया है। पत्र में 2 से 3 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई है और चेतावनी दी गई है कि मांग पूरी नहीं होने पर मजिस्ट्रेट और उनके परिवार की हत्या कर दी जाएगी। इसके अलावा पत्र में मजिस्ट्रेट पर रिश्वत लेने, गलत फैसले देने और गरीबों के साथ अन्याय करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
पत्र के अंत में ‘तुम्हारा मौत नक्सली संगठन, कांकेर-बस्तर (छत्तीसगढ़)’ लिखकर साफ तौर पर धमकी दी गई है कि ‘तुम्हें कोई नहीं बचा सकता’। यह पत्र नीली स्याही से हाथ से लिखा गया है। वहीं, लिफाफे पर ‘एल.के.एल. बस्तर कांकेर छत्तीसगढ़’ और न्यायालय का पता अंकित पाया गया, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
मजिस्ट्रेट ने अपनी शिकायत में पत्र भेजने वाले की पहचान करने और उसके नेटवर्क का खुलासा करने की मांग की है। इस घटना के सामने आने के बाद न्यायिक और प्रशासनिक महकमे में चिंता का माहौल है।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है और हर पहलू की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। इस तरह की घटना न केवल न्यायपालिका की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है, बल्कि कानून-व्यवस्था के लिए भी एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है।
