नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर अब भारतीय रसोई तक पहुंचता दिख रहा है। सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में आपूर्ति बाधित होने के कारण देश में एलपीजी (LPG) का स्टॉक तेजी से घट रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) अब एक आपातकालीन योजना पर विचार कर रही हैं, जिसके तहत घरों में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर के स्थान पर केवल 10 किलोग्राम गैस भरकर आपूर्ति की जा सकती है। मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य उपलब्ध गैस को कम मात्रा में बांटकर अधिक से अधिक परिवारों तक पहुंचाना है ताकि किसी भी घर में चूल्हा पूरी तरह बंद न हो।
तेल कंपनियों के प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक, 14.2 किलोग्राम का सिलेंडर सामान्यतः 35 से 40 दिनों तक चलता है, जबकि 10 किलोग्राम की मात्रा भी एक मध्यम वर्गीय परिवार की जरूरत को लगभग एक महीने तक पूरा कर सकती है। इस कटौती से जो अतिरिक्त गैस बचेगी, उसे उन क्षेत्रों और घरों में भेजा जा सकेगा जहां स्टॉक पूरी तरह खत्म होने की कगार पर है। यदि सरकार इस योजना को हरी झंडी देती है, तो इन सिलेंडरों पर विशेष स्टिकर लगाए जाएंगे और ग्राहकों से वसूले जाने वाले दाम भी वजन के अनुपात में कम कर दिए जाएंगे। यह रणनीति उस समय सामने आई है जब खाड़ी देशों से आने वाली सप्लाई चेन लगभग ठप हो गई है।
भारत के लिए चिंता की बात यह है कि देश अपनी एलपीजी जरूरतों का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, जिसमें से 90 प्रतिशत आपूर्ति अकेले खाड़ी देशों से होती है। वर्तमान युद्ध की स्थिति में फारस की खाड़ी में भारत के झंडे वाले छह एलपीजी टैंकर फंसे हुए हैं और रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे हैं। पिछले सप्ताह की रिपोर्ट बताती है कि केवल दो जहाज ही भारत पहुंच सके, जिनमें कुल 92,700 टन एलपीजी आई थी। यह मात्रा भारत की महज एक दिन की औसत खपत के बराबर है, जो देश की ऊर्जा सुरक्षा पर गहराते संकट की ओर इशारा करती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई कड़ी चेतावनी ने इस अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है।
आंकड़ों के अनुसार, भारत में एलपीजी की दैनिक खपत लगभग 93,500 टन है, जिसमें से 86 प्रतिशत हिस्सा घरेलू उपभोक्ताओं के पास जाता है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने वर्तमान स्थिति को बेहद “चिंताजनक” करार दिया है और नागरिकों से गैस का मितव्ययता से उपयोग करने की अपील की है। हालांकि सरकार आधिकारिक तौर पर घरेलू सप्लाई को नियमित बता रही है, लेकिन जमीनी हकीकत और सप्लाई की कमी ने आम जनता के बीच घबराहट पैदा कर दी है। आने वाले दिनों में यदि हॉर्मुज का रास्ता नहीं खुलता है, तो रसोई गैस की राशनिंग जैसे कड़े कदम उठाए जाना लगभग तय माना जा रहा है।
