शेयर बाजार में कोहराम: सेंसेक्स 1,746 अंक टूटा, निफ्टी में भी भारी गिरावट; निवेशकों के डूबे ₹12 लाख करोड़

Stock Market Today: वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में ही निवेशकों में घबराहट का माहौल बन गया, जिसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ नजर आया।

Bombay Stock Exchange (Image Credit: Wikipedia)
Bombay Stock Exchange (Image Credit: Wikipedia)

Stock Market Today: भारतीय शेयर बाजार के लिए सोमवार, 23 मार्च 2026 का दिन ‘ब्लैक मंडे’ साबित हुआ। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध की धमकियों ने घरेलू निवेशकों के विश्वास को पूरी तरह हिला कर रख दिया है। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन बाजार खुलते ही बिकवाली का ऐसा सैलाब आया कि सेंसेक्स और निफ्टी ताश के पत्तों की तरह ढह गए। सुबह के सत्र में ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 12 लाख करोड़ रुपये घट गया, जो बाजार की घबराहट को साफ दर्शाता है।

बाजार के आंकड़ों पर गौर करें तो सुबह 10:40 बजे तक सेंसेक्स 1,746 अंक यानी 2.34% की भारी गिरावट के साथ 72,785.99 के स्तर पर आ गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 542 अंक या 2.35% टूटकर 22,566.85 पर कारोबार करता दिखा। बाजार की चौड़ाई (Breadth) भी काफी कमजोर रही, जहाँ गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों के मुकाबले पांच गुना से भी अधिक थी। लगभग 2,990 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि महज 592 शेयर ही हरे निशान में टिक पाए।

इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे प्रमुख कारण मध्य-पूर्व (Middle East) में गहराता संकट है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को दी गई कड़ी चेतावनी ने निवेशकों को डरा दिया है। ट्रंप ने शनिवार को स्पष्ट कहा था कि यदि ईरान ने 48 घंटों के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नहीं खोला, तो उसके ऊर्जा ढांचे को पूरी तरह तबाह कर दिया जाएगा। इसके जवाब में तेहरान ने भी बिजली संयंत्रों पर हमले की स्थिति में जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद करने की धमकी दी है। इस तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को ऊंचे स्तर पर बनाए रखा है, जिससे वैश्विक विकास और कंपनियों की कमाई प्रभावित होने की आशंका गहरी हो गई है।

शेयर बाजार के साथ-साथ मुद्रा बाजार में भी भारतीय रुपये की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। सोमवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 18 पैसे गिरकर 93.91 प्रति डॉलर के अपने अब तक के सबसे निचले रिकॉर्ड स्तर (All-time Low) के करीब पहुंच गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारत के आयात बिल में भारी बढ़ोतरी की आशंका ने रुपये पर भारी दबाव बनाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तनाव कम नहीं होता और तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक घरेलू शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और बिकवाली का यह दौर जारी रह सकता है।

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