नई दिल्ली: लोकसभा में भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर जबरदस्त सियासी टकराव देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए इस समझौते को “थोक सरेंडर” करार दिया और कहा कि देश के अहम फैसले अब भारत नहीं, बल्कि अमेरिका तय करेगा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने भारत की ऊर्जा, वित्त और व्यापारिक संप्रभुता को विदेशी ताकतों के हाथों सौंप दिया है।
लोकसभा में बेहद गरमागरम बहस के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि अब यूनाइटेड स्टेट्स यह तय करेगा कि भारत किस देश से तेल खरीदेगा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब भारत की ऊर्जा नीति प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि अमेरिका बनाएगा। राहुल ने कहा कि जब अमेरिका यह कहता है कि आप फलां देश से तेल नहीं खरीद सकते, तो इसका सीधा मतलब है कि भारत की एनर्जी को हथियार बना दिया गया है।
राहुल गांधी ने सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार खुद स्वीकार करती है कि आज की दुनिया में एनर्जी और फाइनेंस को वेपनाइज़ किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद उसी अमेरिका को भारत की फाइनेंस और एनर्जी पर नियंत्रण देने दिया गया। उन्होंने कहा कि जब अमेरिका यह तय करेगा कि टैरिफ किसके घटेंगे और किसके बढ़ेंगे, तो यह सिर्फ ट्रेड नहीं बल्कि भारत की संप्रभुता पर सीधा हमला है।
अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने भावुक अंदाज में कहा, “आपने इंडिया बेच दिया है। क्या आपको इंडिया बेचने में शर्म नहीं आती? आपने हमारी मां को बेच दिया है।” उनके इस बयान के बाद सदन में भारी हंगामा देखने को मिला।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अगर INDIA गठबंधन सत्ता में होता और अमेरिका से बातचीत करता, तो भारत के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाता। राहुल ने कहा कि INDIA अलायंस ट्रंप से साफ कहता कि भारत दोस्ती निभाएगा, लेकिन बराबरी के स्तर पर। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका डॉलर को मजबूत करना चाहता है तो भारत उसका साथ दे सकता है, लेकिन भारत की सबसे बड़ी ताकत भारतीय जनता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
राहुल गांधी ने डेटा और डिजिटल ट्रेड को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि डेटा भारत की सबसे बड़ी संपत्ति है और एआई की दुनिया में यही “पेट्रोल” है। लेकिन सरकार ने डिजिटल ट्रेड डील्स में डेटा लोकलाइजेशन, डिजिटल टैक्स और सोर्स कोड जैसे अहम मुद्दों पर नियंत्रण छोड़ दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने फ्री डेटा फ्लो की अनुमति देकर अपनी रणनीतिक ताकत कमजोर कर दी है।
कृषि क्षेत्र को लेकर राहुल गांधी ने कहा कि यह पहली बार है जब भारतीय किसानों को मशीनीकृत अमेरिकी खेती से सीधे मुकाबले के लिए छोड़ दिया गया है। मक्का और सोयाबीन जैसी फसलों में दरवाजे खोलकर सरकार ने गरीब किसानों को कुचलने का रास्ता बना दिया है। राहुल ने कहा कि इससे पहले किसी प्रधानमंत्री ने ऐसा नहीं किया और भविष्य में भी कोई प्रधानमंत्री ऐसा नहीं करेगा।
उन्होंने दावा किया कि इस ट्रेड डील के बाद अमेरिका से भारत का इंपोर्ट 46 बिलियन डॉलर से बढ़कर 146 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। राहुल गांधी के मुताबिक भारत के टैरिफ 3 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हो गए हैं, जबकि अमेरिका के टैरिफ 16 प्रतिशत से घटकर शून्य हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी कंपनियों को 20 साल की टैक्स छूट दी गई है और टेक्सटाइल सेक्टर को कमजोर कर दिया गया है।
अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने एपस्टीन फाइल का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ प्रभावशाली बिजनेसमैन पर गंभीर आरोप होने के बावजूद उन्हें जेल नहीं हुई। इस पर केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने राहुल गांधी को टोका और कहा कि वह बिना आधार के आरोप लगा रहे हैं।
राहुल गांधी ने संसद में मार्शल आर्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले ग्रिप आती है और फिर चोक। उन्होंने कहा कि दुनिया अब युद्ध के दौर में प्रवेश कर चुकी है, जिसकी झलक गाजा और इजरायल में दिख चुकी है। राहुल ने कहा कि पुराने वैश्विक सिस्टम को चुनौती दी जा रही है और बदलते हालात में डेटा सबसे बड़ी संपत्ति बन चुका है।
राहुल गांधी के इस भाषण के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिससे यह साफ हो गया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील आने वाले दिनों में राजनीति का बड़ा मुद्दा बनी रहेगी।
