India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते ने न केवल आर्थिक गलियारों में हलचल मचाई है, बल्कि पड़ोसी देश पाकिस्तान के लिए भी एक बड़ी कूटनीतिक मुसीबत खड़ी कर दी है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते का विवरण साझा करते हुए एक ऐसा नक्शा जारी किया है, जिसने कश्मीर मुद्दे पर वाशिंगटन के बदलते रुख का स्पष्ट संकेत दे दिया है। इस आधिकारिक नक्शे में पूरे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत के अभिन्न अंग के रूप में दिखाया गया है, जिसमें पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला कश्मीर (PoK) और गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल हैं।
यह नक्शा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है। आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय मानचित्रों में जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों को विवादित या ‘लाइन ऑफ कंट्रोल’ (LoC) के साथ दिखाया जाता था, लेकिन अमेरिका द्वारा जारी इस ताज़ा नक्शे में किसी भी तरह की कोई नियंत्रण रेखा या विवादित क्षेत्र का उल्लेख नहीं है।
अमेरिकी प्रशासन का यह कदम भारत के उस अटूट रुख पर मुहर लगाता है जिसमें वह दशकों से पीओके को अपना हिस्सा बताता रहा है। रक्षा और कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका के आधिकारिक अकाउंट से इस तरह का नक्शा आना यह दर्शाता है कि अब वाशिंगटन इस मुद्दे पर निष्पक्ष (Neutral) रहने के बजाय भारत के पक्ष को मजबूती से स्वीकार कर रहा है।
From tree nuts and dried distillers’ grains to red sorghum and fresh and processed fruit, the U.S.-India Agreement will provide new market access for American products. pic.twitter.com/mqpP10LJp1
— United States Trade Representative (@USTradeRep) February 6, 2026
इस विवादित नक्शे की पृष्ठभूमि में भारत और अमेरिका के बीच हुआ वह ट्रेड फ्रेमवर्क है, जिसके तहत दोनों देशों ने आपसी व्यापारिक बाधाओं को कम करने पर सहमति जताई है। यूएसटीआर ने अपनी पोस्ट में बताया है कि इस समझौते से अमेरिकी कृषि उत्पादों जैसे ट्री नट्स, लाल ज्वार और प्रसंस्कृत फलों के लिए भारत के विशाल बाजार खुल जाएंगे। हालांकि, व्यापार की इन बातों से कहीं अधिक चर्चा उस राजनीतिक संदेश की हो रही है जो अमेरिका ने पाकिस्तान को दिया है। ऐसे समय में जब पाकिस्तान आर्थिक बदहाली से जूझ रहा है और अपने पुराने सहयोगी अमेरिका से मदद की उम्मीद लगाए बैठा है, अमेरिका का यह कदम उसकी विदेश नीति के लिए एक बड़ी विफलता साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के साथ आया यह मानचित्र एक नई वैश्विक व्यवस्था की ओर इशारा कर रहा है। यह न केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सफल कूटनीति का प्रमाण है, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘विकसित भारत’ के संकल्प की ओर बढ़ते कदमों को वैश्विक मान्यता मिलने जैसा भी है। पाकिस्तान के लिए यह संदेश साफ है कि अब वैश्विक मंच पर भारत का लोहा माना जा रहा है और कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर उसकी पुरानी दलीलें अब बेअसर साबित हो रही हैं।
