देशभर में आज कैब का ‘महा-ब्रेकडाउन’: ओला-उबर ड्राइवरों की 6 घंटे की हड़ताल, यात्री परेशान

Ola-Uber Strike: तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) के आह्वान पर शनिवार को ड्राइवरों ने ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ के तहत छह घंटे तक ऐप से लॉग-आउट रहने का फैसला किया है।

Ola and Uber Drivers Hold 6-Hour Nationwide Strike
Ola and Uber Drivers Hold 6-Hour Nationwide Strike

Ola-Uber Strike: देश के प्रमुख शहरों में आज ओला, उबर और रैपिडो जैसी ऐप-आधारित कैब और बाइक टैक्सी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) के आह्वान पर शनिवार को ड्राइवरों ने ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ के तहत छह घंटे तक ऐप से लॉग-आउट रहने का फैसला किया है। इस हड़ताल की वजह से शनिवार सुबह से ही कई यात्रियों को कैब मिलने में परेशानी हो रही है और उपलब्ध गाड़ियों का किराया भी सामान्य से अधिक दिखाई दे रहा है। यूनियन का कहना है कि यह हड़ताल देशभर के उन लाखों गिग वर्कर्स के हितों की रक्षा के लिए है जो लंबे समय से कंपनियों के शोषण और आय की असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।

इस आंदोलन के पीछे मुख्य रूप से दो बड़ी मांगें हैं। यूनियन के अध्यक्ष शेख सलाहुद्दीन ने स्पष्ट किया है कि सरकार को तुरंत हस्तक्षेप कर न्यूनतम आधार किराया (Base Fare) अधिसूचित करना चाहिए। वर्तमान में एग्रीगेटर कंपनियां अपनी मर्जी से किराया तय करती हैं, जिससे ड्राइवरों की बचत लगातार कम होती जा रही है।

दूसरी प्रमुख मांग निजी वाहनों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक लगाने की है। ड्राइवरों का विरोध मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2025 के उस प्रावधान से है जो निजी नंबर प्लेट वाली गाड़ियों को सवारी ढोने की अनुमति देता है। ड्राइवरों का तर्क है कि इससे कमर्शियल लाइसेंस वाले चालकों की आजीविका पर बुरा असर पड़ रहा है और बाजार में प्रतिस्पर्धा अनुचित हो गई है।

गिग वर्कर्स की इस दयनीय स्थिति पर हालिया आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने भी चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में गिग इकोनॉमी में काम करने वाले लोगों की संख्या बढ़कर करीब 1.2 करोड़ हो गई है, लेकिन इनमें से लगभग 40 प्रतिशत वर्कर्स की मासिक आय 15 हजार रुपये से भी कम है। आय की इस भारी अस्थिरता और बढ़ती महंगाई के बीच ड्राइवरों का कहना है कि उनके पास हड़ताल के अलावा अपनी बात सरकार तक पहुँचाने का कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था।

यूनियन ने सरकार से मांग की है कि वह जल्द से जल्द उनसे संवाद शुरू करे और एक ऐसा निष्पक्ष नियम बनाए जिससे ड्राइवरों और यात्रियों, दोनों के हितों के बीच संतुलन बना रहे।

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