Pariksha Pe Charcha 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को परीक्षा पे चर्चा के नौवें संस्करण में देशभर के विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने परीक्षा के तनाव, आत्मविश्वास, समय प्रबंधन, सपनों और जीवन कौशल जैसे विषयों पर विस्तार से बात की। इस बार परीक्षा पे चर्चा का आयोजन अलग अंदाज़ में किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री ने गुजरात के देवमोगरा, तमिलनाडु के कोयंबटूर, छत्तीसगढ़ के रायपुर, असम के गुवाहाटी और दिल्ली स्थित सात, लोक कल्याण मार्ग पर छात्रों से सीधे संवाद किया।
छात्रों से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सपना न देखना अपने आप में एक गलती है, लेकिन केवल सपने देखना ही काफी नहीं होता। सपनों को साकार करने के लिए कर्म को प्राथमिकता देनी होती है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे अपने सपनों को लिखकर रखें और उन्हें सार्वजनिक न करें। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि कई लोग यह सोचते हैं कि पहले सुविधाएं मिलेंगी, तब क्षमता आएगी, लेकिन वास्तविकता यह है कि क्षमता मेहनत से आती है, सुविधाओं से नहीं। आज कई साधनहीन परिवारों के बच्चे भी बोर्ड परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कंफर्ट जोन जीवन नहीं बनाता, बल्कि जीवन जीने का तरीका व्यक्ति को आगे बढ़ाता है।
समय प्रबंधन को लेकर प्रधानमंत्री ने छात्रों को सुझाव दिया कि वे रात को सोने से पहले अगले दिन की योजना लिखें और दिन के अंत में यह जरूर देखें कि कौन से काम पूरे हो पाए और किन वजहों से समय बर्बाद हुआ। इससे अपने समय के सही उपयोग को समझने में मदद मिलती है। गेमिंग के विषय पर बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि केवल मनोरंजन के लिए गेम खेलना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि गेमिंग भी एक स्किल है और छात्रों को नए गेम विकसित करने और इनोवेशन पर ध्यान देना चाहिए।
जब छात्रों ने 12वीं कक्षा के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को लेकर सवाल किया, तो प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे समय में प्राथमिकता 12वीं की पढ़ाई को देनी चाहिए। अगर 12वीं की तैयारी मजबूत होगी तो आगे की प्रतियोगी परीक्षाओं में भी उसका लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि कई बार माता-पिता यह चाहते हैं कि बच्चे कम उम्र में ही बहुत कुछ हासिल कर लें, लेकिन बच्चों को सीखने और आगे बढ़ने के लिए समय देना जरूरी है।
पढ़ाई करने के बावजूद चीजें भूल जाने की समस्या पर प्रधानमंत्री ने कहा कि जो बातें हमें जीवन भर याद रहती हैं, वे वही होती हैं जिनसे हम भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में अंक और मार्क्स को लेकर जरूरत से ज्यादा दबाव बना दिया गया है, जबकि टॉप करने वालों के नाम भी कुछ समय बाद याद नहीं रहते। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि परीक्षा जीवन का लक्ष्य नहीं है, बल्कि जीवन निर्माण का एक माध्यम है। शिक्षा का उद्देश्य केवल नंबर लाना नहीं, बल्कि जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए।
स्किल और मार्क्स को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जीवन में संतुलन सबसे जरूरी है। उन्होंने बताया कि स्किल दो तरह की होती है—एक प्रोफेशनल स्किल और दूसरी लाइफ स्किल। प्रोफेशनल स्किल के साथ-साथ दिनचर्या, स्वास्थ्य, अनुशासन और व्यवहार जैसी लाइफ स्किल पर भी ध्यान देना उतना ही आवश्यक है। किसी एक तरफ ज्यादा झुकाव व्यक्ति को असंतुलित कर सकता है।
शिक्षकों की पढ़ाने की गति को लेकर छात्रों की शिकायत पर प्रधानमंत्री ने शिक्षकों को सलाह दी कि वे बच्चों से सिर्फ एक कदम आगे रहें। अगर यह दूरी ज्यादा हो जाती है तो बच्चे पीछे छूट जाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर शिक्षक पहले ही यह बता दें कि अगले सप्ताह क्या पढ़ाया जाएगा, तो छात्र पहले से तैयारी कर सकते हैं और उनकी रुचि भी बढ़ती है।
पढ़ाई के पैटर्न को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि हर व्यक्ति का सीखने का तरीका अलग होता है। जैसे जीवन में हर किसी की पसंद अलग होती है, वैसे ही पढ़ने का तरीका भी अलग हो सकता है। किसी को सुबह पढ़ना पसंद होता है तो किसी को रात में। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अपने अनुभव पर भरोसा रखें और दूसरों की सलाह सुनकर खुद के लिए सही रास्ता तय करें।
इस बीच यह भी बताया गया कि परीक्षा पे चर्चा 2026 ने पिछले वर्ष बनाए गए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। पिछले साल जहां 3.56 करोड़ लोगों ने पंजीकरण कराया था, वहीं इस बार चार करोड़ से अधिक ऑनलाइन प्रतिभागी पहले ही रजिस्ट्रेशन कर चुके हैं। परीक्षा पे चर्चा 2026 के लिए ऑनलाइन पंजीकरण 1 दिसंबर 2025 से मायगव पोर्टल पर शुरू हुए थे।
