एक साल पहले पाकिस्तान के गृहमंत्री मोहसिन नकवी ने बलूच लड़ाकों को महज़ “एक SHO की मार” करार देते हुए कहा था कि उनके खिलाफ किसी बड़े सैन्य ऑपरेशन की जरूरत ही नहीं है। लेकिन आज ठीक एक साल बाद वही कथित “एक SHO की मार” बलूचिस्तान में पिछले 35 घंटे से लगातार तांडव मचा रही है। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) का ‘ऑपरेशन हीरॉफ 2.0’ प्रांत के बड़े हिस्से में जारी है और राजधानी क्वेटा को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख शहरों से हर घंटे झड़पों और धमाकों की खबरें सामने आ रही हैं।
फिलहाल ग्वादर शहर में पाकिस्तानी सेना और बलूच लड़ाकों के बीच जबरदस्त संघर्ष चल रहा है। सुबह से अब तक ग्वादर में तीन बड़े धमाके हो चुके हैं, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। इसके साथ ही नोश्की, पंजगुर, केच और आसपास के इलाकों में भी सुरक्षा बलों और बलूच लड़ाकों के बीच मुठभेड़ों की खबरें मिल रही हैं।
बलूच लिबरेशन आर्मी ने दावा किया है कि उसके लड़ाकों ने अब तक 150 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिकों, फ्रंटियर कॉर्प्स, रेंजर्स और पुलिसकर्मियों को मार गिराया है। नोश्की शहर में बलूच लड़ाके पिछले 24 घंटे से एक पुलिस थाने पर कब्जा जमाए हुए हैं और इलाके से गुजरने वाले हाईवे को भी बंद कर दिया गया है। इसी दौरान BLA ने यह भी कहा है कि उसने कल बंधक बनाए गए नोश्की के डिप्टी कमिश्नर मोहम्मद हुसैन को रिहा कर दिया है।
BLA के मुताबिक उसका टकराव पुलिस या सरकारी कर्मचारियों से नहीं है, लेकिन जब पुलिसकर्मी पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर कार्रवाई करते हैं, तब उन्हें निशाना बनाया जाता है। संगठन का कहना है कि उसका संघर्ष सीधे पाकिस्तानी सैन्य ढांचे के खिलाफ है।
जिन बलूच लड़ाकों को गृहमंत्री मोहसिन नकवी ने “एक SHO की मार” बताया था, उन्हें काबू में करने के लिए अब पाकिस्तानी सेना को 12 से ज्यादा शहरों में हेलीकॉप्टर, ड्रोन और भारी सैन्य संसाधनों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। पाकिस्तानी सेना का दावा है कि उसके ऑपरेशन में अब तक 92 बलूच लड़ाके मारे गए हैं, जिनमें तीन फिदायीन हमलावर भी शामिल हैं। सेना का कहना है कि ऑपरेशन अब भी जारी है।
गौर करने वाली बात यह है कि पाकिस्तान के मौजूदा चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भी पिछले साल दावा कर चुके थे कि बलूच विद्रोहियों की कुल संख्या महज़ 1500 के आसपास है। मौजूदा हालात में यह दावा भी सवालों के घेरे में आ गया है।
बलूचिस्तान की आज़ादी को लेकर चल रहा यह ऑपरेशन BLA प्रमुख बशीर ज़ेब बलूच की अगुआई में अंजाम दिया जा रहा है, जिन्होंने 2018 में संगठन की कमान संभाली थी। इस बीच पाकिस्तानी सेना ने बिना किसी देश का नाम लिए आरोप लगाया है कि BLA के हमलों की योजना और समन्वय “बाहरी देशों” से किया जा रहा है।
हालांकि पाकिस्तान के रिटायर्ड मेजर आदिल राजा ने सेना और शहबाज शरीफ सरकार के इन दावों पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा कि पाकिस्तान की कठपुतली सरकार और सेना अपनी नाकामी छिपाने के लिए दूसरों को दोष दे सकती हैं, लेकिन यह सच्चाई नहीं बदल सकती कि वोटों की चोरी से बनी सरकार और वही चोरी करने वाली सेना के साथ देश की जनता खड़ी नहीं है।
आदिल राजा ने आगे कहा कि इमरान खान के खिलाफ बार-बार “फितना” शब्द के इस्तेमाल से अब इस शब्द का कोई अर्थ नहीं रह गया है और उससे जुड़ी पूरी कहानी ही खोखली साबित हो चुकी है। उन्होंने सवाल उठाया कि वह “एक SHO” और वे कथित 1500 लोग आखिर अब कहां हैं, जिनका हवाला दिया जा रहा था।
बलूच लड़ाकों के लगातार हमलों को देखते हुए बलूचिस्तान के गृह मंत्रालय ने प्रांत में अगले एक महीने के लिए कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। मोटरसाइकिल पर दो या उससे अधिक लोगों के बैठने पर रोक लगा दी गई है। हथियारों के इस्तेमाल और सार्वजनिक प्रदर्शन पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा वाहनों पर ब्लैक फिल्म, गैर-पंजीकृत वाहनों के संचालन, एक स्थान पर पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने, धरना-प्रदर्शन और रैली निकालने पर भी पाबंदी लगा दी गई है। सार्वजनिक स्थानों पर चेहरे ढकने पर भी रोक लगा दी गई है।
35 घंटे बीत जाने के बावजूद हालात काबू में नहीं आने से साफ है कि बलूचिस्तान में हालिया हिंसा ने पाकिस्तान सरकार और सेना के दावों की पोल खोल दी है। आने वाले दिनों में यह संकट किस दिशा में जाएगा, इस पर पूरे क्षेत्र की नजर टिकी हुई है।
