UGC के नए नियमों के विरोध में BKU (भानु) नेता राम ठाकुर ने खून से लिखा राष्ट्रपति को पत्र

UGC Law Protest: बुधवार, 28 जनवरी 2026 को अलीगढ़ में भारतीय किसान यूनियन (भानु) के मंडल अध्यक्ष और राष्ट्रीय सचिव राम ठाकुर ने इन नियमों के विरोध में एक चौंकाने वाला कदम उठाया। उन्होंने अपने स्वयं के रक्त से राष्ट्रपति के नाम एक पत्र लिखा और कलेक्ट्रेट पहुंचकर एडीएम को सौंपा।

BKU (Bhanu) Leader Ram Thakur Writes Letter in Blood to President Protesting New UGC Rules
BKU (Bhanu) Leader Ram Thakur Writes Letter in Blood to President Protesting New UGC Rules

UGC Law Protest: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए भेदभाव विरोधी नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन अब एक बेहद भावुक और उग्र स्तर पर पहुंच गया है। बुधवार, 28 जनवरी 2026 को अलीगढ़ में भारतीय किसान यूनियन (भानु) के मंडल अध्यक्ष और राष्ट्रीय सचिव राम ठाकुर ने इन नियमों के विरोध में एक चौंकाने वाला कदम उठाया। उन्होंने अपने स्वयं के रक्त से राष्ट्रपति के नाम एक पत्र लिखा और कलेक्ट्रेट पहुंचकर एडीएम को सौंपा।

इस अनोखे विरोध प्रदर्शन की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए राम ठाकुर ने कहा कि उन्होंने सुबह अपने घर पर एक चिकित्सक को बुलाकर अपना खून निकलवाया और उसे एक पात्र में एकत्रित किया। उसी रक्त का इस्तेमाल कर उन्होंने राष्ट्रपति से मांग की है कि यूजीसी के नए भेदभाव विरोधी नियमों को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए। राम ठाकुर का तर्क है कि ये नए नियम एक वर्ग विशेष के हितों की अनदेखी करते हैं और जातिगत आधार पर भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं।

राम ठाकुर ने स्पष्ट किया कि वे छात्रों के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के भेदभाव के खिलाफ हैं, चाहे वह किसी भी जाति का हो। उन्होंने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि यदि इस कानून में तुरंत संशोधन नहीं किया गया, तो सवर्ण समाज और उनके संगठन के लोग बड़े पैमाने पर सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। इस दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में उनके साथ शिवा ठाकुर, रजत ठाकुर और संगठन के अन्य प्रमुख सदस्य भी मौजूद थे, जिन्होंने सरकार के इस फैसले के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

शिक्षण संस्थानों में ‘समानता समितियों’ के गठन को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब कानूनी गलियारों के साथ-साथ जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। एक तरफ जहां सुप्रीम कोर्ट में इस पर सुनवाई होनी है, वहीं दूसरी तरफ जमीन पर इस तरह के कड़े विरोध प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं।

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