NEET aspirant death case: पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट (NEET) छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मोड़ पर आ गया है। 6 जनवरी 2026 को शुरू हुआ यह मामला, जिसे शुरुआत में पुलिस आत्महत्या मान रही थी, अब फॉरेंसिक रिपोर्ट और परिजनों के दावों के बाद सामूहिक बलात्कार और हत्या की दिशा में मुड़ गया है। इस हाई-प्रोफाइल केस की संजीदगी को देखते हुए बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन ने जांच की कमान अब सीआईडी (CID) को सौंप दी है।
फॉरेंसिक रिपोर्ट से हुआ चौंकाने वाला खुलासा
इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब एफएसएल (FSL) की बायोलॉजिकल रिपोर्ट सार्वजनिक हुई। रिपोर्ट में मृतका के कपड़ों पर पुरुष स्पर्म मिलने की पुष्टि हुई है, जिससे यह साफ हो गया है कि मौत से पहले छात्रा के साथ दुष्कर्म किया गया था। इस खुलासे ने पटना पुलिस की शुरुआती ‘नींद की गोली और टाइफाइड’ वाली थ्योरी को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। परिजनों ने पहले दिन से ही छात्रा के शरीर पर चोट के निशान और प्राइवेट पार्ट में जख्मों का हवाला देते हुए हत्या का आरोप लगाया था, जिसे अब वैज्ञानिक आधार मिल गया है।
पॉक्सो (POCSO) एक्ट और डीएनए जांच की प्रक्रिया
परिजनों द्वारा छात्रा के मैट्रिक सर्टिफिकेट और आधार कार्ड पेश किए जाने के बाद, जिसमें उसकी उम्र 18 साल से कम है, जांच टीम ने मामले में पॉक्सो एक्ट की धाराएं जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एसआईटी (SIT) ने इस मामले में छह मुख्य संदिग्धों को हिरासत में लेकर उनका डीएनए सैंपल लिया है। गर्दनीबाग अस्पताल में मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में लिए गए इन सैंपलों को अब छात्रा के कपड़ों से मिले जैविक साक्ष्यों के साथ मैच कराया जाएगा। डीएनए प्रोफाइलिंग इस केस में सबसे बड़ा कानूनी साक्ष्य साबित होगी, जिससे असली अपराधी की पहचान सुनिश्चित की जा सकेगी।
सीआईडी की एंट्री और प्रशासनिक कार्रवाई
मामले की गंभीरता और पुलिस की शुरुआती लापरवाही को देखते हुए दो पुलिस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। अब सीआईडी की टीम ने हॉस्टल के उस कमरे को अपनी निगरानी में ले लिया है जहाँ छात्रा रहती थी। सीआईडी प्रबंधन से नए सिरे से पूछताछ कर रही है और एसआईटी द्वारा जुटाए गए सभी सबूतों को अपने कब्जे में ले लिया है। बिहार के गृह मंत्री सम्राट चौधरी इस मामले की व्यक्तिगत रूप से मॉनिटरिंग कर रहे हैं और उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
महिला आयोग और सामाजिक आक्रोश
बिहार महिला आयोग ने भी इस घटना का कड़ा संज्ञान लिया है। हॉस्टल में सुरक्षा के इंतजामों और प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। छात्रा की मौत के बाद से ही पटना सहित बिहार के कई जिलों में प्रदर्शन हो रहे हैं। माना जा रहा है कि डीएनए रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में कई सफेदपोश चेहरे बेनकाब हो सकते हैं और कुछ बड़ी गिरफ्तारियां जल्द ही संभव हैं। राज्य सरकार पर जल्द से जल्द न्याय सुनिश्चित करने का भारी दबाव है।
