संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान के दुष्प्रचार और सीमा पार आतंकवाद की नीति को बेनकाब किया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि परवथनेनी हरीश ने पाकिस्तान को ‘आतंकवाद का वैश्विक केंद्र’ करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी जमकर क्लास लगाई। उन्होंने पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर पर किए गए दावों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यह क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। भारत ने दोटूक शब्दों में कहा कि जब तक पाकिस्तान अपनी जमीन से चलने वाले आतंकी नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त नहीं करता, तब तक उसके साथ सामान्य संबंधों की कोई गुंजाइश नहीं है।
परवथनेनी हरीश ने अपने संबोधन के दौरान मई 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का विशेष जिक्र करते हुए पाकिस्तानी सेना की हालत का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि किस तरह भारतीय सेना के पराक्रम ने पाकिस्तानी रक्षा तंत्र को हिलाकर रख दिया था। 9 मई 2025 तक भारत पर हमले की धमकियां देने वाला पाकिस्तान, भारतीय ऑपरेशन के बाद पूरी तरह बैकफुट पर आ गया था। भारतीय प्रहार ने पाकिस्तान के एयरबेस, रनवे और हैंगर को तबाह कर दिया था, जिसकी तस्वीरें आज भी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं। हार और तबाही से घबराकर 10 मई को पाकिस्तानी सेना ने स्वयं भारतीय सेना को फोन कर युद्ध रोकने की गुहार लगाई थी। भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान आतंकवाद को ‘न्यू नॉर्मल’ बनाने की जो कोशिश कर रहा था, उसे पूरी तरह विफल कर दिया गया है।
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— India at UN, NY (@IndiaUNNewYork) January 26, 2026
PR @AmbHarishP delivered 🇮🇳’s statement at the @UN Security Council Open Debate on ‘Reaffirming International Rule of Law: Pathways to Reinvigorating Peace, Justice and Multilateralism’. @MEAIndia @IndianDiplomacy pic.twitter.com/AiTD8hIdoD
सिंधु जल संधि को लेकर भी भारत ने अपना कड़ा रुख साफ कर दिया है। राजदूत हरीश ने पाकिस्तान को याद दिलाया कि यह संधि 65 साल पहले दोस्ती और सद्भाव की भावना के साथ की गई थी, लेकिन पाकिस्तान ने तीन युद्धों और हजारों आतंकी हमलों के जरिए इस भरोसे को तोड़ा है। भारत ने अब आतंकवाद और बातचीत को साथ न चलाने का फैसला लेते हुए ऐलान किया है कि जब तक सीमा पार आतंकवाद पर पाकिस्तान का समर्थन स्थायी और अपरिवर्तनीय रूप से खत्म नहीं होता, तब तक सिंधु जल संधि निलंबित रहेगी। भारत ने साफ संदेश दिया कि शांति की उम्मीद केवल एक तरफा नहीं हो सकती और पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।
इसके अलावा भारत ने पाकिस्तान में हाल ही में हुए 27वें संवैधानिक संशोधन और सैन्य प्रभाव पर भी गंभीर सवाल उठाए। परवथनेनी हरीश ने इसे एक ‘संवैधानिक तख्तापलट’ करार देते हुए पाकिस्तान को आत्मनिरीक्षण की सलाह दी। उन्होंने पूछा कि जो देश अपनी सशस्त्र सेनाओं को संवैधानिक तख्तापलट की अनुमति देता है और अपने रक्षा प्रमुख को आजीवन कानूनी प्रतिरक्षा (Immunity) प्रदान करता है, वह दूसरे देशों को कानून के शासन पर प्रवचन कैसे दे सकता है। भारत ने सुरक्षा परिषद को सचेत करते हुए कहा कि इस पवित्र सदन का इस्तेमाल पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को वैध बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
